Tuesday, November 11, 2008

शीशा-ऐ-दिल

"शीशा-ऐ-दिल"

ये माना शीशा-ऐ-दिल ,

रौनके-बाज़ारे- उलफ़त है !

मगर जब टूट जाता है,

तो क़ीमत और होती है !!

25 comments:

जितेन्द़ भगत said...

दर्द खुद-बखुद एक दास्‍तान बन जाती है, और इसका कीमत ही अधि‍क होती है।

अनुपम अग्रवाल said...

ये माना शीशा-ऐ-दिल ,
रौनके-बाज़ारे- उलफ़त है !
मगर जब टूट जाता है,
तो क़ीमत और होती है !!
नहीं सीमा कहीं कोई,यूं,
टूटे दिल की उल्फतकी !
ये बंधन छूट जाता है,
जो नीयत और होती है !!

ताऊ रामपुरिया said...

ये माना शीशा-ऐ-दिल ,
रौनके-बाज़ारे- उलफ़त है !
मगर जब टूट जाता है,
तो क़ीमत और होती है !!


लाजवाब ! तारीफ़ के लिए इससे बढ़ कर मेरे पास शब्द नही हैं !

Rakesh Kaushik said...

it is realy a fine us of words n imaginations

मोहिन्दर कुमार said...

सीमा जी,

शेर अच्छा है मगर यह किसका शेर है... डा शगुफ़्ता जी ने भी अपने ब्लोग पर आज यही डाला है...

seema gupta said...

Mohinder jee, sher maira hee hai, vo blog Firoj Ahmed jee alligarh ka hai unkee vangmaypatrika or ye blog hai jhan maire poems bhee publish hotee hain...is sher ke sath name maira hee hai unke blog pr aapke comment ke liye shukriya....
Regards

Amit verma said...

Bahoot Khoob Kaha (Wo Bhi, Bahoot Khoob Tareeke Se) u are beyond imagination...

amit

Rakesh said...

too good......not a word to say.....

Anonymous said...

Seema,

behtareen sher hai, mujhse iski taareef iski bayhurmati hogee. Ustaad shaayer is par kuch kahen to kahen , main to iske asar meinaakar shaayraana mood mein aa gaya hoon aur shaayad ek ghazal kahne ki khwahish josh mein aaye huyee hai .............abhi do sher haazir-e-khidmat hain, ummeed hai pasand aayengay:

muhabbat ka dilon mein josh khana bhi qayamat hai
magar dil toot-taa hai to qayaamat aur hoti hai

hai dil ka dil se rishta bhi koyi dil ki tarah naazuk
magar isko nibhane kee nazaakat aur hoti hai

भूतनाथ said...

बहुत बेहतरीन रचना ! बधाई !

makrand said...

bahut khubsurat sher
regards

विनय said...

बहुत सुन्दर, वाह-वाह्!

PN Subramanian said...

इतने सारे लोग बोल रहें है, अब हम भी क्यों ना कहें कि बहुत अच्छा लगा.

बवाल said...

वाह वाह सीमाजी क्या खू़बसूरती से पेश किया इस बेहतरीन शेर को. आहा ! आपकी जो असली कला है, वो है साहित्य के पानों में जवाहरात सजाने की. मेरे ख़याल से पढ़ने वालों को इस तफ़्तीश में पड़ने के बजाय, के शेर किसका है ? और क्यों है ? और यहाँ भी है ? तो वहां भी क्यों है ? और मेरी नज़र में अब तलक क्यों न आया ? वगैरह वगैरह, --- उसको पेश करने के अंदाज़ पर जाना चाहिए. दिल की इन हसीन तस्वीरों को देखिये ज़रा, शेर के एक एक क़तरे से कितने ख़लीक़ (शालीन) अंदाज़ से रब्त (वास्ता) रख रही हैं. क्या कहियेगा इसको जनाब मोहिंदर साहेब ? बतलाइए ज़रा.
जीतेन्द्र जी, अनुपम जी, ताऊ जी, कौशिक जी, अमित वर्मा जी, राकेश जी, अनोनिमस जी, भूतनाथजी, मकरंद जी, विनय जी आदि से हम तो पूरी तरह सहमत हैं जी. इस बेहतरीन और बहुत हसीन पेशकश के लिए, आपके साथ साथ ब्लॉगजगत को भी बधाई.

Udan Tashtari said...

सही है टूटने पर ही कीमत का अंदाजा होता है. सुन्दर!!

"अर्श" said...

kisi chij ka bikhar jane par hi uske kimat ka asli pata chalta hai ... bahot khub likha hai aapne..badhai..

राज भाटिय़ा said...

क्या बात है, सब ने इतनी तारीफ़ कर दी हम तो बस ्दुआ ही करे गे इस टुटे दिल के लिये.
बहुत ही सुन्दर,
धन्यवाद

Suresh Chandra Gupta said...

बहुत सुंदर

दीपक said...

आज फ़िर दिल तोड दिया आपने !! जोडो -जोडो कुछ तो जोडो-जोडो !! हा हा हा

अल्पना वर्मा said...

bahut sundar Seema ..bahut sundar!

योगेन्द्र मौदगिल said...

to keemat or hoti hai....
wah seema g wah....

Er. Avinash Pandey said...

nice mam
regards

mukesh said...

bahut hi sunder rachna




dher sari badhiyan

bhoothnath said...

हाँ भई बनी हुई चीजों की जीनत कुछ और होती है......
और टूटी हुई चीजों की कीमत कुछ और होती है.....!!
मर-मर कर जीना तो बहुत ही आसान है ऐ दोस्त....
जिंदादिल लोगों की तो हिम्मत कुछ और होती है.....!!
एक ही बार तो आता है आदम यहाँ धरती पर.....
बनकर रहे आदम ही तो रिवायत कुछ होती है....!!
हम गाफिल लोग ही रहते हैं आदतों के बाईस
और फकीरों की तो हाजत ही कुछ और होती है...!!
धारा के साथ जीने को तो सब जीते हैं "गाफिल"
इसके ख़िलाफ़ वालों की ताकत कुछ और होती है.....!!

Pradeep Kumar said...

wah ! laajawaab !!!!!!!!!!!