Saturday, November 15, 2008

"नज़र "




"नज़र "
आग फैली इधर से उधर लग गयी,
मेरे घर पे किसी की नज़र लग गयी..
दिल में मायूसियों ने है घर लिया,
अब दुआ भी होने बेअसर लग गयी...



28 comments:

Er. Nidhi Mishra said...

nice one seema jee

mehek said...

bahut khub

ताऊ रामपुरिया said...

आग फैली इधर से उधर लग गयी,
मेरे घर पे किसी की नज़र लग गयी..
दिल में मायूसियों ने है घर लिया,
अब दुआ भी होने बेअसर लग गयी...

बहुत सटीक और लाजवाब ! शुभकामनाएं !

दीपक "तिवारी साहब" said...

बेहद सशक्त ! धन्यवाद !

भूतनाथ said...

खूबसूरत अभिव्यक्ती ! लाजवाब !

डॉ .अनुराग said...

bahut khub!

"SURE" said...

आग फैली इधर से उधर लग गयी,
मेरे घर पे किसी की नज़र लग गयी..
दिल में मायूसियों ने है घर लिया,
अब दुआ भी होने बेअसर लग गयी...
........dua chhe beasar ho jaye aapki rachna kabhi beasar nahi hogi...seema ji.aapka lekhan sada hi prabhvi raha hai

AMIT VERMA said...

Dukh se labrez, ek aur kavita..
Ek 'marm' ko jaise tum bayan kerti ho, waise mene kisi ko kerte - na dekha na suna aur na padha!!
Tumhari har kavita me aandar tak kachotne ki quwwat (shakti) hoti he SEEMA....

Abhi bhi ek sensation feel ho rahi he ise padhker, jaise mene kahin aas pass kisi ghar me aag ko lage dekha he aur log bhag rahe hain aur koi he jo nazar se jale iss ghar ko khade khade dekh raha he..

"AMIT VERMA"

राज भाटिय़ा said...

सीमा जी क्या बात है बहुत खुब.
धन्यवाद

मोहन वशिष्‍ठ said...

सीमा जी बस आपके प्रत्‍युत्‍तर ये दो लाईनें


बनीं के चेहरे पे लाखों निशान होते हैं

बनी जब बिगड जाए तो दुश्‍मन हजार होते हें

विनय said...

हम दुआ करेंगे कि यह बुरी नज़र जल्द ही छू हो जाये!

Rakesh said...

very nice line seema .... dil ko chu gayi...

Indian Bollywood Music & Movies said...

Seema, I like to avail your poems on my blog., prior your permission. My contact is kvseth@hotmail.com
Regards
K. V. Seth (Canada)

Udan Tashtari said...

बहुत सुन्दर.

अल्पना वर्मा said...

bahut khuub likha hai aap ne!


aap ke blog par pics dekhne aksar chali aati hun--

[good collections of coloured gems [heartshaped--bahut achchey lagtey hain :)]

Dr. Amar Jyoti said...

बहुत ही सुन्दर भावों की उतनी ही सुन्दर अभिव्यक्ति।

योगेन्द्र मौदगिल said...

वाहवा आप का जवाब नहीं, सीमा जी.....
अपना इमेलआइडी दें
ymoudgil@gmail.com

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

दर्द का अच्छा चित्रण। भगवान करे ये दर्द काफ़ूर हो जाये। खुशियाँ जल्द लौटें।

जितेन्द़ भगत said...

बहुत सुंदर।

ARCHEAV said...

Mene to yahi padha aur suna tha ki
Duaaon me bada aasar hota he..
Itna ki khuda ki marzi ko bhi badal de..

Bass, duaaon me yakeen rakhne ki zaroorat hoti he..
Allah karein, 'Nazar' na lage..

बवाल said...

बहुत ही बेहतरीन ! क्या ख़ूब कहा सीमाजी. आप हर सम्त लाजवाब हो. क्या कहना !

kunal said...

मुश्किल है
सुन्दर होना
और उतना ही सुन्दर लिखना
आप इस बात को गलत
साबित करती हैं.

रश्मि प्रभा said...

तोडके एक तिनका उतार लेना नज़र
लम्हों-लम्हों से बनता है घर
इसे मायूस नहीं करते...........

VisH said...

seema ji ke liye...
kahin ek sahar main mera bhi ghar hai,
magarapne mukkaddar main safar hai,
dikhaai kuch nahi deta, magar fir bhi hai....

bhawno ko vyakt karna koi aapse seekhe....

Jai Ho Magal may ho...

mukesh said...

bahuthi acchi rachna hai


badhiyan

दीपक said...

सही कह रहे है दुआ भी अब काम नही कर रही है !!

दिगम्बर नासवा said...

आग फैली इधर से उधर लग गयी,
मेरे घर पे किसी की नज़र लग गयी..

सुंदर अति उत्तम
हर शब्द लाजवाब है

bhoothnath said...

मैं दुआ कर रहा हूँ.....नज़र जो लगी है....वो बदल भी जाए.....जिन्दगी "तिरी" संभल जाए....जिस नज़र का है ये "करम"....उसका भी घर बस जाए....!!बस...और क्या.....!!