Tuesday, August 26, 2008

मेरे पास





"मेरे पास"
रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास,
तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे पास
रात दिन दिल से ये आवाज़ निकलती है के सुन
आ भी जा के है वक्त भी कम मेरे पास
तू जो आ जाए तो आ जाए मेरे दिल को करार,
दूर मुझसे है तू दुनिया के सितम मेरे पास
दिल में है मेरे उदासी, के है दुनिया में
कहकहे गूँज रहे आँख है नम मेरे पास"

18 comments:

कामोद Kaamod said...

रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास,
तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे पास

vaah... shabdo ko kitni khoobsurati se piroya gaya hai..

G M Rajesh said...

nam ankho aur udaasi liye
milan ki aas
kam vakt kambakht bhi
beech me aur vo nahi paas

achchaa chitr hai

photo men kheench deta hun

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) said...

bechain roohon ki awaz
sun vo aa bhi jaayegaa
door hogi kya tab udaasi
kal dekhen chaahe aaj

अनुराग said...

bahut khoob.....

vipinkizindagi said...

रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास,
तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे पास

behatarin......

Nitish Raj said...

हर दम की तरह सुंदर रचना

Advocate Rashmi saurana said...

bhut hi gahare bhav ke sath rachana ki hai. ati uttam.

नीरज गोस्वामी said...

दिल में है मेरे उदासी, के है दुनिया में
कहकहे गूँज रहे आँख है नम मेरे पास"
सीमा जी आप कब से इतने दुःख भरे गीत लिखने लगीं...खिलखिलाती ज़िन्दगी के गीत लिखिए....फ़िर भी बहुत खूब लिखा है आपने....दर्द के एहसास को जीती हुई रचना.
नीरज

Anonymous said...

yeh ghum hota hi bhari hai, ..............firaaq ka ghum, judai ka ghum,mehboob ke paas na honay ka ghum.Iska kya ilaaj ho siwa iske ki mehboob se mulakaat ho jaaye...."too jo aa jaaye meray dil ko qaraar aa jaaye"............udasi door ho jaayegi, aankhon mein ghum ke aansoo naheen hongay ..phir duniya hum per naheen hum duniya per hunseinge qaheqahey lagayenge...............too jo aajaaye sanam mere paas!

...............is bhavuk aur bhav poorn kavita ke liye badhayee sweekar karen.............."Sakhi"

मीत said...

तू जो आ जाए तो आ जाए मेरे दिल को करार,
दूर मुझसे है तू दुनिया के सितम मेरे पास

bahut sunder likha hai...

Udan Tashtari said...

सुंदर रचना!!बहुत खूब !!

मोहन वशिष्‍ठ said...

बहुत दिनों बाद आपकी रचनाओं को पढकर बहुत ही अच्‍छा लगा
दिल के करीब दर्द होला
मेरे करीब साया होला
दुख दर्द का मेरे साथ होला
तेरी कविता मेरी होला
बहुत खूब बधाई हो

Tarun said...

अति सुन्दर

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुन्दर ओर मन भावन,आप की कविताये मन को छु गई
धन्यवाद

"SURE" said...

दिल में है मेरे उदासी, के है दुनिया में
कहकहे गूँज रहे आँख है नम मेरे पास"
beutifully written

mukesh said...

रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास,
तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे पास
रात दिन दिल से ये आवाज़ निकलती है के सुन
आ भी जा के है वक्त भी कम मेरे पास
तू जो आ जाए तो आ जाए मेरे दिल को करार,
दूर मुझसे है तू दुनिया के सितम मेरे पास
दिल में है मेरे उदासी, के है दुनिया में
कहकहे गूँज रहे आँख है नम मेरे पास"



har line har lavz apni hi kahani bayan kar raha hai,


realy i tooo goooodddddddddd


very very nice


isko bi 1st no. diye jate hai


dher sari badhiya

P. C. Rampuria said...

सुन्दरतम रचना ! बधाई और शुभकामनाएं !

ई-हिन्दी साहित्य सभा said...

तुमको कैसे बताएं
"हमको लगता था सब हार गये,
लेकिन "तुम" आयीं जीवन में,
" हम सब बोझा तार गये
सीमा जी,
आपकी कलम से शब्द निकल कर जब खिलते हैं। तो, हर शब्द बोलने लगते है।
अपनी खुशबू बिखरने लगते है। मानो बागों में बहार आ गई हो - शम्भु चौधरी