Showing posts with label vangmaypatrika 13.SEPT 08. Show all posts
Showing posts with label vangmaypatrika 13.SEPT 08. Show all posts

Tuesday, April 21, 2009

"निगाहे-नाज़"


"निगाहे-नाज़"

बेज़ारी जान की थी या,
किसी गम की गीरफ्तारी थी,
अंधेरी रात मे भी,
" रोशन रूखे- यार देखा"
शायद ये निगाहे-नाज़ की,
" बीमारी थी"

(बेज़ारी - उदासीनता )
(रूखे- यार - प्रेमिका का चेहरा)
(निगाहे-नाज़ - चंचल आँख)

http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_13.html