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Tuesday, November 1, 2011

"अय्याम ने"












"अय्याम ने"



मैं यहाँ बेचैन हूँ तुम वहाँ बेताब हो,


किस जगह लाकर मिलाया है हमें अय्याम ने...


हों कई ऐसे भी जो रहते रहे हो इस तरह,

और रुबाई हो लिखी कोई उमर खय्याम ने...


रात भर जागा किए हैं तेरी यादों के तुफैल,
कितने ख्वाबों को बुना है इस दिले नाकाम ने...


तेरे आने की ख़बर हैं दिल में जागी है उमंग,
कितने दीपक ला जला डाले हैं मेरी शाम ने...


याद करने को नहीं आता है दिल दुःख के वह दिन,
और क्यों तमको नहीं लिखा है मेरे नाम ने....


फिर भि फरमाइश किया है उसको मेरी जान ने,
और किया बदनाम दानी को है उसके काम ने...


अब तड़पता दिल है दानी का बहुत उसके लिये,
कह रहा है तुमसे आ जाओ अचानक मेरे सामने...



Sunday, January 10, 2010

"नयी"







"नयी"

"ज़िंदगी" हो तुम्हारे साथ नयी,
दिन नया हो हमारी रात नयी.....

पिछली बातों को भूल जाएँ हम,
जब भी हो बात सारी बात नयी.......

अब न आयें वो दिन गुज़र जो गए,
हर घड़ी हो तुम्हारे साथ नयी........

हम पुराने रिवाज ठुकरादें,
सारे रिश्तों की सारी जात नयी ........


आज बिछने दो ज़िंदगी की बिसात,
न शह हो जहाँ ना मात नयी.....

वो जो तुमसे है दिल लगा बैठा ,
तेरे घर लाएगा बारात नयी....

Tuesday, May 5, 2009

"मैं"







"मैं "

कलमों के टूटे ढेर थे मैं छेड़ता रहा,
लफ्जों के हेर फेर ने समझा नहीं मुझे....

कच्ची थी सोंधी ख़ाक में मैं बोलता रहा ,
चाकों के एतबार ने चूप्का किया मुझे...

लौहएमकान का का राज़ था क्यों फाश हो गया ,
कुत्बों के इन्तखाब ने रुसवा किया मुझे ... ..

खारे -चमन था लेकिन चुप चाप जी गया ,
कलियों की बेकली ने तड़पा दिया मुझे ....

Saturday, August 2, 2008

"जिदगी भर यही सोचता रह गया"












"जिदगी भर यही सोचता रह गया"

मुझसे मुंह मोड़ कर तुम को जाते हुए,
मूक दर्शक बना देखता रह गया ,
क्या मिला था तुम्हें दिल मेरा तोड़ कर,
जिंदगी भर यही सोचता रह गया ???

भूलने के लिये तुमको हम ने जतन,
क्या नहीं हैं किये ए जान-ऐ-मन,
उतने ही याद आये हो तुम रात दिन,
अपनी यादों से मैं जूझता रह गया???

रास्ता जब बनी रास्ते की गली,
मैं जो गुजरा कभी धडकने बढ़ गयी,
एक खिड़की खुली और तुम्हें देख कर,
मैं जहाँ पर खडा था खडा रह गया???

"जिदगी भर यही सोचता रह गया"






http://swargvibha.freezoka.com/kavita/all%20kavita/Seema%20Gupta/zindagi%20bhar%20yahe%20sochata%20rah%20gaya.htm (http://www.swargvibha.tk/)
http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/S/SeemaGupta/zindgi_bhar_yahi_sochata_rah.htm

Thursday, July 31, 2008

"बातें "



"बातें"

तुम से कहनी हज़ार हैं बातें,
लफ्ज़ कुछ, मगर बेशुमार हैं बातें...
तुम जिगर में उतरती जाती हो,
जो लिखी हमने अश्कबार हैं बातें...
अब दूर तुमसे रहा भी नहीं जाता,
फिर वो ही पहलू -ऐ -यार हैं बातें...
राज-ऐ-दिल लिए भटकते हैं तुम बिन,
क्या करें इस कदर बेकरार हैं बातें...


http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/S/SeemaGupta/baaten.htm