Thursday, September 25, 2008

गम-ऐ-बेवफाई


"गम-ऐ-बेवफाई"

ज़ख्म हूँ रिसता रहूँगा ,
रग -ऐ -लहू मे उतर जाऊंगा,
गम-ऐ-बेवफाई से उपजा हूँ ,
ये ना सोच के भर जाऊंगा...

24 comments:

Rakesh Kaushik said...

touchie really very nice . but again on tht very topic.

but undoubtly it's great.

today i give a new name

"Lady Galib" u r relly able to be tht in my view.



Rakesh KAushik

ताऊ रामपुरिया said...

ज़ख्म हूँ रिसता रहूँगा ,
रग -ऐ -लहू मे उतर जाऊंगा,
गम-ऐ-बेवफाई से उपजा हूँ ,
ये ना सोच के भर जाऊंगा.

बहुत गहरी बात है ! शुभकामनाएं !

दीपक said...

ज़ख्म हूँ रिसता रहूँगा ,
रग -ऐ -लहू मे उतर जाऊंगा,
गम-ऐ-बेवफाई से उपजा हूँ ,
ये ना सोच के भर जाऊंगा.

क्या बात है सुभान-अल्लाह !!

फ़िरदौस ख़ान said...

दिल को छू लेने वाली नज़्म है...

श्रीकांत पाराशर said...

Seemaji, really excellent. no need to say more then this.

Anil Pusadkar said...

गंभीर बात कह दी आपने

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत खूब ...

Birds Watching Group Ratlam (M.P.) said...

bewafaai ka ghum bhi kya khoob kahaa
bina soche lahoo men utarne ka kahaa
jakhm ki risaai bhi jatlaai
ye dillagi thi ke ruswaai

ha ha haa haa ha

Advocate Rashmi saurana said...

bhut sundar. gahari rachana.

manvinder bhimber said...

तुमसे पहेले कहाँ कोई इतना प्यार करता था कौन था जो मेरा हर घड़ी इन्तेज़ार करता था, आज तुझ से हुआ जो रूबरू तो जाना , थीं तसव्वुर तुम कहीं जिस से प्यार करता था "

bahut gahri baat kah di

Nitish Raj said...

बेवफाई से उपजे जख्म भरते नहीं। क्या खूब लिखा है आपने बधाई

PREETI BARTHWAL said...

ज़ख्म हूँ रिसता रहूँगा ,
रग -ऐ -लहू मे उतर जाऊंगा,
गम-ऐ-बेवफाई से उपजा हूँ ,
ये ना सोच के भर जाऊंगा...

बहुत खूब

राज भाटिय़ा said...

जलदी से इन्हे किसी ड्रा० बाबु को दिखाओ ,बरसात का मोसम हे कही नासुर ना बन जाये.... :)
धन्यवाद सुन्दर शेर के लिये, बहुत खुब हमेशा की तरह से

"SURE" said...

ऐ जख्म तू चाहे तो नासूर बन जा
बेवफा की मनीन्द तू मगरूर बन जा
जिन्दा कहाँ रहे हम उस गुमशुदा के बाद
एक तेरा ही तो साथ रहा उस बेवफा के बाद

Rakesh said...

very nice lines...kaise soch lete ho.....

Zahid said...

Hi,

Aap ki ye char line ne sab kuch bayan kar diya hai. Aap ka blog maine Parul ji ke comment list mai se paya...bahot sundar likha hai..baaki ke comments dheere dheere aayenge...hope u wont mind...

आलोक सिंह "साहिल" said...

fantastic four lines.
hmmmmm.......
it pinchs deeply.
ALOK SINGH "SAHIL"

tarun said...

waah ,................................... mere paas iske alawa kuchh nahi kehne ke liye. is peer ko jisne jaana hai.
usko zamane ne mana hai.

tarun said...

aapka web page kamaal ka hai

रविकांत पाण्डेय said...

वेदना की सहज अभिव्यक्ति।

makrand said...

today is world heart day
regards

mukesh said...

badhiya

shama said...

"Zakhm hai, ristaa rahungaa,
.........................
..........................
Ye na sonch bhar jaunga!"
Kin alfazonme tareef karun??

Anonymous said...

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