Saturday, August 30, 2008

"जूनून-ऐ-इश्क"




"जूनून-ऐ-इश्क "

जूनून की बात निकली है तो मेरी बात भी सुन लो,

जूनून-ऐ-इश्क सच्चा है तो फिर हारा नहीं करता


मुक़द्दस है जगह वो क्यूंकि घर माशूक का है वो,

कोई मजनूँ कभी भी अपना दिल मारा नहीं करता


तजस्सुस यह के वोह बोलेगा सच या झूट बोलेगा

जूनून में रह के कोई काम यह सारा नही करता


वो मजनू है और उसके दिल में ही है बसी लैला,

हर एक हूरे नज़र पर अपना दिल वारा नहीं करता


http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_7453.html

15 comments:

दीपक भारतदीप said...

क्या बात है? बहुत बढि़या
दीपक भारतदीप

अनुराग said...

जूनून में रह के कोई काम यह सारा नही करता

bahut khoob.....par ab kise fursat itni ki kais sa deevanapan laye.fikre duniya me uljh gaya hai in dino kais bhi..

dayanidhi said...

कभी - कभी महका जाती हैं,
कभी - कभी बहका जाती हैं,
कभी अंधेरे सूने मन में,
दीपक बन कर आ जाती हैं,
कभी हंसातीं कभी रुलातीं,
आंसू बन कर आ जाती हैं,
जीने को जब लगे जरुरी,
धड़कन बन कर आ जाती हैं,
यादों का अब कौन भरोसा,
बिन चाहे भी आ जाती हैं।

dayanidhi said...

aapke doosre blog par yaadon se sambandhit ek kavita padhi, shabd nahin mile comment ke liye isliye char line post kar di

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत अच्छे ! सुन्दरतम !

makrand said...

वो मजनू है और उसके दिल में ही है बसी लैला,
हर एक हूरे नज़र पर अपना दिल वारा नहीं करता
सिर्फ़ एक शब्द ... बेमिसाल !

Anil Pusadkar said...

wah,kya bat hai

राज भाटिय़ा said...

सीमा जी ओरो का तो पता नही मॆ जब भी किसी काम को करना चाहता हु तो बस एक जनून सवार हो जाता हे, ओर जब तक काम पुरा ना हो मुझे ना नींद आती हे, ओर ना ही कुछ अच्छा लगता हे.
ओर मेरे बच्चो को भी यही आदत पड गई हे, अब इसे पागलपन कहे या इश्क...
आप की कविता बहुत ही अच्छी लगी.
धन्यवाद

seema gupta said...

thanks to all readers for sparing precious time n droping valuable comments suggestions n encouragement. With Regards

G M Rajesh said...

straight & attaking

see fights

vipinkizindagi said...

बहुत बढि़या

मोहन वशिष्‍ठ said...

जूनून में रह के कोई काम यह सारा नही करता
वो मजनू है और उसके दिल में ही है बसी लैला,
हर एक हूरे नज़र पर अपना दिल वारा नहीं करता

वाह जी वाह आज तो लगता है लैला मजनूं भी कैद कर दिए गए

Sanjeet said...

बसती है लैला मजनूं के दिल में ही,
रहे कहां और लैला,
जगह मिलेगी ऐसी और कौन सी,
दिल पाना मजनूं सा कोई खेल नही।

makrand said...

वो मजनू है और उसके दिल में ही है बसी लैला,

हर एक हूरे नज़र पर अपना दिल वारा नहीं करता

long wait
regards

mukesh said...

wah wah seema ji kiya kuhb likha hai,





वो मजनू है और उसके दिल में ही है बसी लैला,

हर एक हूरे नज़र पर अपना दिल वारा नहीं करता