Friday, January 1, 2010

"यूँही बस













"यूँही बस "

तुम मुझ से बोलती रहीं ...चुप चाप यूँही बस,
जख्मो पे हाथ फेरती चुपचाप यूँ ही बस

क्यों लग रहा है दिल को तुम हो आसपास ही ,
आ जाओ मेरे सामने ... चुप चाप यूँ ही बस.

कुछ तो ज़रूर है जो हमे हो रहा है यूं,
तुम ही ज़रा बताओ ना ... चुप चाप यूँ ही बस.

तुमको भी क्या वही हुआ जो हमको हो गया,
खामोश इंकलाब सा ...चुप चाप यूँ ही बस.

अब तक कहाँ थी क्यों नहीं मुझको मिली कभी ,
मैं सोचता ही जा रहा ...चुप चाप यूँ ही बस.........










18 comments:

daniashans' said...

dekhna ummeed ka chiraagh na bujhnay payay
warna imkan ki dunia mein andhera hoga

ek diya dil ka jalaayay huay baitha dani
uska deedar jo hoga to savera hoga

Anonymous said...

bahut khoobsoorat..........

"aradhika jain"

Anonymous said...

very touching yaar.......you are superb......
Rakesh Verma

advocate rashmi saurana said...

क्यों लग रहा है दिल को तुम हो आसपास ही ,
आ जाओ मेरे सामने ... चुप चाप यूँ ही बस.
bhut gahari. sundar. likhati rhe.

मोहन वशिष्‍ठ said...

यूं ही बस चुप चाप कमेंट कर रहा हूं सुंदर

Anonymous said...

क्यों लग रहा है दिल को तुम हो आसपास ही कहीं,
आ जाओ मेरे सामने ... चुप चाप यूँही बस.


अगर सामने आ जाये तो यह कविता लिख पाना मुश्किल हो जायेगा . कविता अच्छी है .
Firoz Ahmad

ilesh said...

तुमको भी क्या वही हुआ जो हमको हो गया,
खामोश इंकलाब सा ...चुप चाप यूँ ही बस.

अब तक कहाँ थी क्यों नहीं मुझको मिली कभी ,
मैं सोचता ही जा रहा ...चुप चाप यूँ ही बस.........


bahot hi sundar likha he aapne

mukesh said...

"yu hi bus'

bahut khubsorat seema ji

G M Rajesh said...

baitha hun chupchaap bas
likh diya yun hi bas
pata hai milogi kabhi na kabhi
hun isi liye chupchaap bas

jis din kah diya jubaan se
hoga fir inklaab bas

kya kahun ab baithana lag rahaa thik chupchaap bas

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

बहुत खूब. बहुत बढिया.

डॉ. मनोज मिश्र said...

तुमको भी क्या वही हुआ जो हमको हो गया,
खामोश इंकलाब सा ...चुप चाप यूँ ही बस.....
इन लाइनों पर खास ध्यान के साथ हर लाइन खूबसूरत,
उम्दा ,बेजोड़ .

महफूज़ अली said...

दिल को छू लेने वाले लफ़्ज़ों के साथ बहुत खूबसूरत कविता.........


Regards....

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बहुत सुन्दर लिखा है आपने ..बेहतरीन अभिव्यक्ति शुक्रिया

निर्मला कपिला said...

तुमको भी क्या वही हुआ जो हमको हो गया,
खामोश इंकलाब सा ...चुप चाप यूँ ही बस
वाह सीमा जी बहुत खूब सुन्दर रचना के लिये बधाई

अजय कुमार said...

भावनात्मक उद्गगार वाली रचना
प्रशंसा कर रहा हूं ,चुपचाप यूं ही बस

Arvind Mishra said...

ऐसा लगता है जैसे ये कविता मैंने लिखी हो ...कवि किस तरह समष्टि से जुड़ता है ऐसी सहज संवाद करती रचनायें उदाहरण बन जाती है.

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

yuhin bas nahi, sundar kavita kahee hai aapne.

अमृत कुमार तिवारी said...

आपकी कविताओं को पढ़के कहीं खो गया...चुपचाप बस..