Saturday, August 30, 2008

"जूनून-ऐ-इश्क"




"जूनून-ऐ-इश्क "

जूनून की बात निकली है तो मेरी बात भी सुन लो,

जूनून-ऐ-इश्क सच्चा है तो फिर हारा नहीं करता


मुक़द्दस है जगह वो क्यूंकि घर माशूक का है वो,

कोई मजनूँ कभी भी अपना दिल मारा नहीं करता


तजस्सुस यह के वोह बोलेगा सच या झूट बोलेगा

जूनून में रह के कोई काम यह सारा नही करता


वो मजनू है और उसके दिल में ही है बसी लैला,

हर एक हूरे नज़र पर अपना दिल वारा नहीं करता


http://vangmaypatrika.blogspot.com/2008/09/blog-post_7453.html

Friday, August 29, 2008

"शबे-फुरकत"





"शबे-फुरकत"

" शबे-फुरकत थी ,
"और"
जख्म - पहलु में,
कोहे - गम ने की ,
शब- बेदारीयाँ हमसे...


(शबे फुरकत- विरह की रात ,
कोहे - गम- दुःख का पहाड़ ,
शब - बेदारीयाँ - रात को जागना )

Tuesday, August 26, 2008

मेरे पास





"मेरे पास"
रूह बेचैन है यूँ अब भी सनम मेरे पास,
तू अभी दूर है बस एक ही ग़म मेरे पास
रात दिन दिल से ये आवाज़ निकलती है के सुन
आ भी जा के है वक्त भी कम मेरे पास
तू जो आ जाए तो आ जाए मेरे दिल को करार,
दूर मुझसे है तू दुनिया के सितम मेरे पास
दिल में है मेरे उदासी, के है दुनिया में
कहकहे गूँज रहे आँख है नम मेरे पास"

Thursday, August 21, 2008

दीवानगी

"दीवानगी"

ये मेरी दीवानगी ,
और उसकी संगदिली ,
रोज मिलने की सजा भी ,
और अदा हो बेदीली

Wednesday, August 20, 2008

हाथ की लकीरों मे

"हाथ की लकीरों मे"

हम तो रहते थे,

"कहीं"

रूह की तहरीरों मे,

"कहीं"लिखें थे,
तेरी हाथ की लकीरों मे ,

हमें हैरत है की,

तुमने नहीं देखा कैसे....

Monday, August 18, 2008

"नयी"







"नयी"

"ज़िंदगी" हो तुम्हारे साथ नयी,
दिन नया हो हमारी रात नयी.....

पिछली बातों को भूल जाएँ हम,
जब भी हो बात सारी बात नयी.......

अब न आयें वो दिन गुज़र जो गए,
हर घड़ी हो तुम्हारे साथ नयी........

हम पुराने रिवाज ठुकरादें,
सारे रिश्तों की सारी जात नयी ........


आज बिछने दो ज़िंदगी की बिसात,
न शह हो जहाँ ना मात नयी.....

वो जो तुमसे है दिल लगा बैठा ,
तेरे घर लाएगा बारात नयी....

Wednesday, August 13, 2008

मोहब्बत-या-रब




"मोहब्बत-या-रब"

हम ख़ुद अपनी तलाश में थे,

ज़बान पे कितने सवाल हैं अब ,

उन्ही सवालों की गर्दिशों मे,

न जाने कितने ख़याल हैं अब,

ना जाने क्यूं आत्मा छु गयी है ,

निगाह तुमने जो मुझपे डाली ,

जो दिल हमारा जगमगा गया है,

मोहब्बत-या-रब के कमाल हैं अब,

मेरी तरफ़ को जो आ रहे हैं,

उन रास्तों पर क़दम तो रखो ,

बिछा के रख देंगे रौशनी हम ,

तुम्हारे दानी मशाल हैं अब


Tuesday, August 12, 2008

इंतज़ार


"इंतज़ार"

अब भी उनके ख़त का हमें इंतज़ार रहता है,
अब भी दिल उनके लिए बेकरार रहता है
उनके कहने पर भी की उनको हम से नफरत है,
हम को न जाने क्यूँ उनसे ही प्यार रहता है

Saturday, August 9, 2008

आवारा

"आवारा"

मायूसियां थीं मेरे दिल में,
एक उदासी की तरह ,
जुस्तुजू में मैं तेरी,
होने लगा आवारा ;
चारा गर बन के,
तेरे प्यार ने हिम्मत बांधी,
राहबर हो के सियाह रात में,
तू ही है चमकता तारा ;
अब तेरी चाह में,
दिन रात रहा करता हूँ,
पहले यूँ रहा करता था
अब यूँ रहता हूँ आवारा

Thursday, August 7, 2008

सुखमय प्यार

"सुखमय प्यार "


कब से तुझे निहार रहा हूँ ,

चंचल सुंदर मुख मंडल ,

अपने से मैं हार रहा हूँ .....

यह वो ही तो दिन है

जब मैने मांग भरी तुम्हारी ,

गजरा ये सुख की बेला

मैं तब से तुम्हें पुकार रहा हूँ ,

आ जाओ अब चैन नहीं है

सुख देता दिन रैन नही है ,

जीवन सफल करो तुम आ कर

कह दूँगा साकार रहा हूँ ,

मैं तेरा जन्म जन्म का प्रेमी

तेरा सुखमय प्यार रहा हूँ ..."

Wednesday, August 6, 2008

"अय्याम ने"








"अय्याम ने"


मैं यहाँ बेचैन हूँ तुम वहाँ बेताब हो,

किस जगह लाकर मिलाया है हमें अय्याम ने...

हों कई ऐसे भी जो रहते रहे हो इस तरह,

और रुबाई हो लिखी कोई उमर खय्याम ने...

रात भर जागा किए हैं तेरी यादों के तुफैल,
कितने ख्वाबों को बुना है इस दिले नाकाम ने...

तेरे आने की ख़बर हैं दिल में जागी है उमंग,
कितने दीपक ला जला डाले हैं मेरी शाम ने...

याद करने को नहीं आता है दिल दुःख के वह दिन,
और क्यों तमको नहीं लिखा है मेरे नाम ने....

फिर भि फरमाइश किया है उसको मेरी जान ने,
और किया बदनाम दानी को है उसके काम ने...

अब तड़पता दिल है दानी का बहुत उसके लिये,
कह रहा है तुमसे आ जाओ अचानक मेरे सामने...


Monday, August 4, 2008

"मुझे अपनाया है"




"तुम ने मुझे अपनाया है"
" और"
मेरी कायनात को .............
मेरी खुशी को गम को,
"और"
मेरी हयात को.......
अब तो खुशी से,
जीना भी आसान हो गया ....
"तुम ने"
जो अपना हाथ दिया मेरे हाथ को ".........

Saturday, August 2, 2008

"जिदगी भर यही सोचता रह गया"












"जिदगी भर यही सोचता रह गया"

मुझसे मुंह मोड़ कर तुम को जाते हुए,
मूक दर्शक बना देखता रह गया ,
क्या मिला था तुम्हें दिल मेरा तोड़ कर,
जिंदगी भर यही सोचता रह गया ???

भूलने के लिये तुमको हम ने जतन,
क्या नहीं हैं किये ए जान-ऐ-मन,
उतने ही याद आये हो तुम रात दिन,
अपनी यादों से मैं जूझता रह गया???

रास्ता जब बनी रास्ते की गली,
मैं जो गुजरा कभी धडकने बढ़ गयी,
एक खिड़की खुली और तुम्हें देख कर,
मैं जहाँ पर खडा था खडा रह गया???

"जिदगी भर यही सोचता रह गया"






http://swargvibha.freezoka.com/kavita/all%20kavita/Seema%20Gupta/zindagi%20bhar%20yahe%20sochata%20rah%20gaya.htm (http://www.swargvibha.tk/)
http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/S/SeemaGupta/zindgi_bhar_yahi_sochata_rah.htm

Friday, August 1, 2008

तेरी अंजुमन में आ के



"तेरी अंजुमन में आ के"

तुमने तसल्ली पा ली थोडी देर बात कर के,
मेरी तिशनगी बढा दी, ये ज़रा सा साथ कर के ....

कभी वह भी दिन तो आए, तेरे सामने मैं बैठूं ,
यूँ ही साथ साथ चलते, यूँ ही सारी बात कर के ....

हुआ मैं नसीब वाला, तेरी अंजुमन में आ के,
मेरे दर्द-ऐ-दास्ताँ को, है सुना समात कर के....

तेरी जीत में है पिन्हा मेरी जिंदिगी की खुशियाँ
मेरी जिदिगी बढ़ा दी मुझे ख़ुद से मात कर के ....

तुझे ढूंढता था पहले तुझे मांगता है अब भी,
मेरा दिल कहाँ गया है मुझे बे-सबात कर के.....

तेरे आने की ख़बर है मेरे दिल के रास्तों पर,
कहीं चोट लग न जाए ज़रा एहतिआत कर के......